बच्चों
में स्वाध्याय की आदत
बच्चों
में स्वाध्याय की आदत डालना, उन्हें ज्ञानार्जन की सही राह दिखाना है. छोटे बच्चे
अपने-आप पड़ने नहीं बैठते. उनके साथ बैठना
पड़ता है या उन पर नजर रखनी पड़ती है. अगर बच्चों में शुरू से अपने आप पड़ने की
आदत डाल दी जाए तो यह आपके लिए मददगार होती है.
कब
और कैसे करें शुरुआत—जैसे ही आपका बच्चा पहली कक्षा में जाता
है, उसमें स्वाध्याय की आदत डालने की शुरुआत की जा सकती है. इसके लिए चाहें, तो
बच्चे की शिक्षक-शिक्षिका से बात करके कुछ
ऐसी अध्ययन सामग्री जुटाएं, जो स्कूल की किताबों से हटकर हो. यह संभव न हो, तो
अंग्रेजी व हिंदी के पाँच-पाँच शब्द लिखने से भी शुरुआत की जा सकती है या किसी
रोचक किताब )जो बच्चे की उम्र के हिसाब से हो(
एक-दे पेज पड़ने के
लिए कहें. ऐसा रोज 10 मिनट से करना आरंभ करें. ज्यादा समय खींचने की कोशिश न करें, खासतौर पर
बच्चे की मर्जी के खिलाफ. हो सकता
है बच्चा रोज 10 मिनट के लिए भी मना करे, तो हफ्ते में तीन दिन भी तय किए जा
सकते हैं. जैसा और जितना भी तय करें, पर इस तरह से पड़ने का
नियम न तोड़ें. बाद में बच्चे
की रुचि व कक्षा दो में आने पर समय
व दिन बड़ाए जा सकते हैं.
शुरू
में बच्चा चाहेगा कि माता-पिता में कोई न कोई
पूरे समय साथ बैठे. बाद में आप तब ही मदद करें, जब बच्चा मदद माँगे.
समय
सारिणी बनाएं—बच्चा स्कूल से आकर, खा-पीकर सो
ले, एक घंटा खेल ले, तब उसे स्वाध्याय के
लिए बैठाएं. इस मामले में
अभिभावकों को थोड़ा व्यवहारिक
दृष्टिकोण ही अपनाना होगा. कअई स्कूलों में रोज होमवर्क दिया जाता है. ऐसे में रोज
एक यी दो पेज पड़ना काफी
होगा. जहाँ होमवर्क सिर्फ सप्ताहांत में
दिया जाताहै, वहाँ सप्ताह में चार
दिन एकाध पेज लिखना, एक या
दो गणित के प्रश्न हल करना या कुछ पेज पड़े जा सकते
हैं. शुरू में 10-15 मिनट के
लिए बच्चे के साथ बैठें,
बाद में जैसे-जैसे कक्षा बड़ती
जाएगी, बच्चा खुद ही अपनी पड़ाई
पर ध्यान देने लगेगा और स्वाध्याय
के फायदे आपको दिखने लगेंगे.
प्रशंसा
से न चूकें—जब बच्चा स्वयं पड़ने लगे, तो उसकी
बहुत प्रशंसा करें. उससे कहें कि उसे अपने आप पड़ते देखकर
आप बेहद खुश हैं और ऐसे बच्चे पर सब नाज करते हैं. आप उसकी
रोज की पड़ाई व लिखाई की जाँच करें और उसकी इस होम नोटबुक पर
कुछ उत्साहवर्द्धक नोट लिखें. अगर संभव हो
तो कुछ रंग-बिरंगे स्टिकर्स चिपकाकर अपनी टिप्पणी लिखें. इससे बच्चा और ज्यादा खुश होगा और दूसरे दिन ज्यादा उत्साह से पड़ेगा.
आप देखेंगे फायदे—वह
स्वतंत्र रूप से पड़ने व अपनी पड़ाई के
प्रति आश्वस्त महसूस करेगा, उसकी
एकाग्रता भी बड़ेगी. वह लक्ष्य तय करना व काम
को महत्व के मुताबिक प्राथमिकता देना सीखेगा. अगर उच्चारण
या लिखाई संबंधी कोई दोष है, तो
वह भी समय रहते दूर हो जाएगी.